Monday, October 3, 2011

THE ‘G’ OF LIFE!


Genocide in the world is in full swing;
‘PEACE’ is what all corrupt leaders sing!

One day when there will be no creed;
Oh RICH what will happen to all the greed!

The innocent Poor are daily killed;
While Rich’s coffers are being filled!

Oh world, what have you really gained!
Causing everyone so much Pain!!

Johnny D
3rd October 2011

Friday, September 30, 2011

अर्ज है...

हमें वो भूल भी जाये पर हम कैसे उन्हें भूले
आज भी धड़कता है दिल उनके ही नाम पर 

है मुक़द्दर ये हमारा की रह न सके हम उनके
उनका मुक़द्दर जुड़कर भी जुदा है देखो कैसे

हे खुदा तू ही बता फिर मिलाया हमें तुने क्यों इस तरह
जुदा करना ही था हमको तो किसी और से मिलाया होता 

--- स्वरचित ---


Sunday, September 18, 2011

अर्ज है...

हर फासला दूरियाँ ख़तम करती है मगर...
'डी' फासला निभाती हैं दूरियाँ भी तो!

--- स्वरचित ---

Saturday, September 10, 2011

मैं हूँ गरीब तो क्या?

(The poem is inspired by my recent
experience @ Dhadak Mohim)

मैं जीता हूँ अपनी ही छोटी सी दुनियाँ में...
जहाँ खाने के नाम में दो रोटी बस है मेरे लिए

मैं जीता हूँ...
जहाँ बिमारियों व दुखों से मेरी ज़िन्दगी भरी है

मैं जीता हूँ...
जहाँ भीख मांगने से मर जाना बेहतर समझा जाता है

मैं जीता हूँ...
जहाँ प्रकृति को देवता का दर्ज़ा दिया गया है पूर्वजों ने     

मैं जीता हूँ...
मैंने कभी दुनिया से नहीं कहा कि मेरी मदद करो

मैं जीता हूँ...
जहाँ मेहनत करना ज़िन्दगी का दूसरा नाम है

मैं जीता हूँ...
मैं नहीं जानता क्यों दूसरों को छोटा समझा जाता है

मैं जीता हूँ...
लेकिन दुनियाँ फिर भी मेरा शोषण करती है क्यों?

मैं जीता हूँ...
मुझे कृपा करके मेरे हाल पर छोड़ दो, मैं सुख से जीना चाहता हूँ

मैं जीता हूँ...
अमीर मेरी दुनियाँ में आकर सब तहस-नहस कर देते हैं क्यों?

मैं जीता हूँ...
मैंने कब किसी को कोई नुकसान पहुँचाया है

मैं जीता हूँ...
मेरी ज़िन्दगी मुझे छोड़कर सभी को अमीर बना देती है

मैं जीता हूँ...
पर ये वहसी दुनियावाले मुझे हर पल मारने में लगे रहते हैं 

मैं हूँ गरीब तो क्या हुआ...
धन्य है भगवन का जिसने मुझे गरीब पैदा किया!!! 


हाँ, मैं गरीब हूँ...
पर मैं दुनियाँवालों को कुछ न कुछ अपनी ज़िन्दगी में देता ही रहता हूँ!

--- स्वरचित ---
१० सितम्बर २०११  







Tuesday, August 16, 2011

उठो देश के नेता, जागो अपनी नींद से तुम

(From my archive... English translation is given below the Original)


उठो देश के नेता 
जागो अपनी नींद से तुम
अपनी भूलकर देश की सोचो
नहीं तो तुम न रहोगे तुम
बन जाओगे फिर से ग़ुलाम
क्या यही चाहते हो तुम?
देश को बाँट कर भागों में
क्या राज कर सकोगे तुम?

झुलस रहा है नफरत में देश सारा
आजादी की पचासवी वर्षगाँठ पर
भाई लड़ रहा आज भाई से
धर्म लड़ रहा है आज धर्म से
भारतीय हो गए हैं एक-दुसरे के खून के प्यासे
भारतीय नहीं रहे अब भारत के
टुकड़ों में बांट कर भारत को तुम
क्या राज कर सकोगे तुम?

वह समय था आज से बेहतर
जब भारत था ग़ुलाम
हर नेता दे रहा था बलिदान अपना
भारत की आजादी के खातिर
देशभक्ति नारा ही नहीं
था धर्म हर भारतीय का
बहा रहे थे लहू अपना
कि राज कर सकोगे तुम!

आज पर तुम्हें हुआ क्या है 
कि फैला रहे हो आतंक अपने ही देश में
एक दिन वह था मेरे नेता
जब लहू बहा कर पाया था हमने अपने भारत को
कर्म माँग रहा है देश भारत हमारा
उठो, उठो देश के नेता
जागो अपनी नींद से तुम!

--- स्वरचित ---
२३ जनवरी १९९९ 



Wake up, wake up leaders of the nation, wake up from your sleep!

Wake up leaders of the nation,
Wake up from your sleep;
Think about the country forgetting yourself;
Otherwise you will not remain you;
Once again you will become slaves,
Do you wish this to happen?
By dividing the nation,
How will you rule the nation?

The whole nation is engulfed in hatred,
Today on the fiftieth anniversary of Independence;
Brothers are fighting with brothers today,
Religions are fighting with religions today;
Indians have become deadly among each other,
Now Indians are no more India's ;
Fragmenting the nation into pieces ,
How will you manage to rule?

Those times were far better than today,
When India was under British Regime;
Every leader was sacrificing their lives,
For the sake of India's freedom;
Patriotism was not only the slogan,
But it was the only religion of every Indian;
Shedding their blood selflessly,
So you could rule today!


What has happened to you today,
You are spreading hatred in your own country;
Those were the days my leaders,
When millions gave away their lives to free India;
Our nation is calling for action;
Wake up, wake up leaders of the nation,
Wake up from your sleep!

Johnny D
23rd January 1999


Monday, August 15, 2011

मत कर तू अपने देश से प्रेम ऐ देशवासियों

मत कर तू अपने देश से प्रेम ऐ देशवासियों 
नहीं तो भ्रष्ट नेताओ के तले रोंदा जायेगा

हो सके तो लूट ले देश को जमकर तू
तेरा बाल भी बांका कोई न कर पायेगा 

जमा कर देना स्विस बैंक में करूड़ों तू
तुझे जेल में भी नेता बिरयानी खिलायेगा 

हाँ, नरसंघार कर सके तू मासूमों की अगर
PM से ज्यादा सुरक्षा तुझे मिल जायेगा

मत कर तू अपने देश से प्रेम ऐ देशवासियों 
नहीं तो भ्रष्ट नेताओ के तले रोंदा जायेगा  

--- स्वरचित ---


Sunday, August 14, 2011

है ये कैसा देश भारत हमारा....

स्वराज नहीं, भ्रष्ट राज कहो

आज़ादी है यहाँ देश को लूटने की
नहीं आज़ादी है देशप्रेमी को 'डी' 
है ये कैसा देश भारत हमारा....
है ये कैसा देश भारत हमारा....

--- स्वरचित ---