Monday, March 7, 2011

अर्ज है...

अँधेरी दुनिया ने न जाना कितना सुकून है प्रकाश में जीना
हम टिमटिमाते लौ ही सही, प्रकाश में जीना हमें प्यारा है 'डी' 

--- स्वरचित --- 


अर्ज है...

दफ़न हो गए हैं वो सारे चिराग अहले चमन में 'डी' 
जिनकी लौ दूर तक अंधकार को प्रकाशित करती थी

दफ़न न करना उस लौ की रौशनी को अपने दिल में 'डी'
इस जगमगाती दुनिया में चारो ओर अँधेरा ही अँधेरा है 

--- स्वरचित ---

Sunday, March 6, 2011

सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...

लुट न जाये जब तलक सब की इज्ज़त
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
मारे जब तलक न जायेंगे हर गरीब
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
ज़मीन जब तलक न खिसक जाये पांव तले
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
२०० साल सोये तो अंग्रेज़ लूट ले गए सब कुछ
अभी तो सिर्फ ६३ साल ही हुए है नींद में 
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
जब तलक लूट न ले जायेंगे सब कुछ
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...
सोते रहेंगे हर हिन्दुस्तानी बेखबर...

--- स्वरचित ---

Friday, March 4, 2011

अर्ज है...

कोहराम चारो ओर दुनिया में बयान करती है 'डी' 
खुलूस की खुलूस को न समझ सकी ज़माना अब तक 

--- स्वरचित ---

Thursday, March 3, 2011

अधुरा चित्र...

लाखों है रंग चमन में लेकिन
हर रंग है फीका खून के रंग से...
कैसे भरूँ 'डी' इस चित्र में रंग
हर रंग तो फीका है ज़माने में....

क्या ये चित्र कभी होगी रंगीन
क्या इसमें भरे जायेंगे सभी रंग
रंग जो मुझे चाहिए इस चित्र के लिए
जहान में अब तक 'डी' मिले नहीं क्यों..


कहाँ मिलेगा भगत सिंह वाला बसंती रंग मुझे?
लाल बहादुर शास्त्री वाला श्वेत क्या मिलेगा कभी?
नेताजी वाला रंग लाल गर्म लहू से सिंचा हुआ?
आजाद जैसा इन्द्रदनुशी रंग कहाँ से लाऊँ मैं?


श्वेत-श्याम में ये अधुरा चित्र
पुकार रहा है रंगों को
बेरंग न रह जाये ये चित्र
आओ इस चित्र को रंगीन बनाये 



--- स्वरचित --- (The poem is still developing...)

Wednesday, March 2, 2011

THE KILLING FIELDS PM MANMOHAN SINGH HAS CREATED


(The poem was inspired by the 28th Feb 2011
killings of innocent poor villagers by police in 
Kakarapalli, Andhra Pradesh )


है ये दास्तान मेरे हिंदुस्तान की
जहाँ गरीबों को रोज रौंदा जा रहा
गोलियों का शिकार बनाया जा रहा है 
हर लाश की कीमत लगायी जा रही है
सब हमारे प्रधान मंत्री के कहने पर
एक नया इतिहास रचा जा रहा है

Indian Shining का नारा लगाया जा रहा है 
हकीकत बयान कर रही है मगर एक सच की
जहाँ चंद अमीरजादे और अमीर बन जाये
उसके लिए सरकार गरीबों की बलि चढ़ा रही है 
छोटे-छोटे गाँवों में, आदिवासी इलाकों में
रोज सरे आम सरकारी कत्लेआम हो रहा है

Police तो बनायीं गयी थी अवाम की रक्षा के लिए
पर यहाँ तो ये बन बैठें है सरकारी दरिन्दे
गरीबों पर अत्याचार कोई नयी बात नहीं
ये तो रोज गरीबों का शिकार करते हैं सरकार के कहने पर
है ये दास्तान मेरे हिंदुस्तान की
जहाँ गरीबों को रोज रौंदा जा रहा

कौन रोकेगा इस नरसंहार को?
कब तक यूँ ही गरीबों का बलि चढ़ेगा?
कब तक भारतवासी यूँ ही मुख्बदिरों की तरह चुप रहेंगे?
क्यों विश्व के ठेकेदार UNO ये तमाशा चुपचाप देख रही है?
कब भारत के प्रधान मंत्री अपना नरसंहार बंद करेगा?
ये है दुखद दयनीय दास्तान मेरे हिंदुस्तान की...

--- स्वरचित ---  

Tuesday, March 1, 2011

प्यार

ये कश्ती गुजरती है भँवरों से
फिर भी है तुमने प्यार किया

खायी थी कसमे लाख मगर
उन पर न तुमने ऐतबार किया

मुक़द्दर में न सही वह थी अगर
तुमने उनसे क्यों फिर प्यार किया 

नफरत दिल में पनपती है अगर
न कहना किसी से कि तुमने प्यार किया

नफरत कैसे कर सकते हो उनसे
'डी' जिसको है तुमने प्यार किया

--- स्वरचित ---